Vishwakarma Puja Aarti विश्वकर्मा पूजा आरती, कथा पूजन विधि

भारत मे कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा दुनिया के पहले इंजीनियर है। कर्मा पूजा के दिन इनकी पूजा की जाती है आइये जानते है विश्वकर्मा पूजा कैसे की जाती है विश्वकर्मा पूजा की कथा क्या है, पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है विश्वकर्मा जी आरती और पूजा विधि के बारे मे।

विश्वकर्मा पूजा कथा (Story of Vishwakarma puja 2021 )

विश्वकर्मा वास्तुदेव के पुत्र थे इनकी माता का नाम अंगीरसी था। वस्तुदेव एक महान ऋषि और विद्वान थे था ब्रम्हा जी के मानस पुत्र थे। अपने पिता की ही तरह विश्वकर्मा जी भी बड़े ज्ञानी और विद्वान थे। ब्रम्हा जी की कृपा से इन्होने सृष्टि के निर्माण मे अपना सहयोग दिया और भगवत स्थान प्राप्त किया।

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विश्वकर्मा पूजा 2021
Vishwakarma puja image 2021

विश्वकर्मा जी मे ही भगवान शंकर की त्रिशूल और भगवान विष्णु की सुदर्शन चक्र का निर्माण किया, तथा सोने की लंका जिसको भगवान शिव ने रावण को दान मे दिया था विश्वकर्मा ने ही बनाया था। पांडवो की इंद्रप्रस्थ नगरी को भी इन्होने ही बनाया था।भगवान कृष्ण के लिए द्वारिका नगरी को भी इन्होने ही बनाया था।

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विश्वकर्मा पूजा विधि

विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन यजमान को सूरज निकलने से पहले स्नान कर के पिले वस्त्र पहन कर चौके पर बैठा होता है। सामने विश्वकर्मा जी की मूर्ति या फोटो रख सकते है। फिर जिन सामानो की पूजा करनी होती है उनको पहले धो लेकिन फिर पूजा करते वक़्त उनपर हल्दी और रोणी से तिलक लगाया ले, फिर चावल का अक्षत मार कर विश्वकर्मा जी की मूर्ति या फोटो पर तिलक लगाया जाता है।उसके बाद फूल, अगरबत्ती, फल, मिठाई,गंगा जल अर्पित कर दे। सारे सामानो पर धुप दीप दिखा दे फिर उनपर रक्षा सूत्र बांध दे।इसके बाद पूजा में ‘ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:’, ‘ॐ अनन्तम नम:’, ‘पृथिव्यै नम:’ मंत्र का जप करना चाहिए। पूजा समाप्त होने के बाद लोगो मे प्रसाद वितरित कर दे।

17 सितम्बर 2021 विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त दो दिन है। 17 सितम्बर दिन शुक्रवार को सुबह 6:07 से 18 सितम्बर को 3:36 मिनट तक है। राहु काल मे पूजा वर्जित है।

विश्वकर्मा पूजा आरती ( Vishwakarma Puja Aarti )

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।

शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।

ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।

संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।

सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।

मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7 ॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥

विश्वकर्मा पूजा मंत्र Vishwakarma puja manta

Vishwakarma Puja mantra in Sanskrit

ओम आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:।

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