प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बायोग्राफी हिन्दी ( prime minister Narendra Modi Biography In Hindi, Narendra Modi Birthday

भारत के 15 वे प्रधानमंत्री Narendra Modi biography, कार्यकाल, राजनैतिक जीवन, उपलब्धिया,

नरेंद्र दामोदर दास मोदी चाय बेचने से ले कर प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय कर चुके नरेन्द मोदी अब तक लगातार दूसरी बार भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी बायोग्राफी

वाराणसी से लोकसभा सांसद भी चुने गये हैं। वे भारत के प्रधानमन्त्री पद पर आसीन होने वाले स्वतन्त्र भारत में जन्मे प्रथम व्यक्ति हैं। इससे पहले वे 7 अक्तूबर 2001 से 22 मई 2014 तक गुजरात राज्य के मुख्यमन्त्री रह चुके हैं। मोदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं।

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नरेंद्र मोदी बायोग्राफी ( Narendra Modi Biography )

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी की प्रारंभिक जीवन

नरेन्द्र मोदी का जन्म तत्कालीन बॉम्बे राज्य के महेसाना जिला स्थित वडनगर ग्राम में हीराबेन मोदी और दामोदरदास मूलचन्द मोदी के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में 17 सितम्बर 1950 को हुआ था। वह पैदा हुए छह बच्चों में तीसरे थे। मोदी का परिवार ‘मोध-घांची-तेली’ समुदाय से था, जिसे भारत सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। वह पूर्णत: शाकाहारी हैं।

पूरा नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी
पिता दामोदर दास मोदी
माता हीराबेन मोदी
पत्नी जसोदा बेन चमनलाल
भाई Prahlad Modi
Amrit Modi
Pankaj Modi
Soma Modi
जन्मदिन 17 सितम्बर 1950
जन्मस्थान वड़नगर
राशि वृश्चिक राशि
गुजरात के मुख्यमंत्री रहे 2001-2014
प्रधानमंत्री के रूप मे प्रथम कार्यकाल 26 मई 2014 – 24 मई 2019
प्रधानमंत्री के रूप मे द्वितीय कार्यकाल 30 मई 2019
राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी
वेबसाइट narendramodi.in
सोशल मीडिया Pm Modi Instagram Handle
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नेट वर्थ —-
नरेंद्र मोदी बायोग्राफी

भारत पाकिस्तान के बीच द्वितीय युद्ध के दौरान अपने तरुणकाल में उन्होंने स्वेच्छा से रेलवे स्टेशनों पर सफ़र कर रहे सैनिकों की सेवा की। युवावस्था में वह छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए | उन्होंने साथ ही साथ भ्रष्टाचार विरोधी नव निर्माण आन्दोलन में हिस्सा लिया। एक पूर्णकालिक आयोजक के रूप में कार्य करने के पश्चात् उन्हें भारतीय जनता पार्टी में संगठन का प्रतिनिधि मनोनीत किया गया। किशोरावस्था में अपने भाई के साथ एक चाय की दुकान चला चुके मोदी ने अपनी स्कूली शिक्षा वड़नगर में पूरी की। उन्होंने आरएसएस के प्रचारक रहते हुए 1980 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर परीक्षा दी और विज्ञान स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।

अपने माता-पिता की कुल छ: सन्तानों में तीसरे पुत्र नरेन्द्र ने बचपन में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता का भी हाथ बँटाया। बड़नगर के ही एक स्कूल मास्टर के अनुसार नरेन्द्र हालाँकि एक औसत दर्ज़े का छात्र था, लेकिन वाद-विवाद और नाटक प्रतियोगिताओं में उसकी बेहद रुचि थी। इसके अलावा उसकी रुचि राजनीतिक विषयों पर नयी-नयी परियोजनाएँ प्रारम्भ करने की भी थी।

नरेंद्र मोदी और जसोदा बेन की शादी

13 वर्ष की आयु में नरेन्द्र की सगाई जसोदा बेन चमनलाल के साथ कर दी गयी और जब उनका विवाह हुआ, तब वह मात्र 17 वर्ष के थे। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार पति-पत्नी ने कुछ वर्ष साथ रहकर बिताये। परन्तु कुछ समय बाद वे दोनों एक दूसरे के लिये अजनबी हो गये क्योंकि नरेन्द्र मोदी ने उनसे कुछ ऐसी ही इच्छा व्यक्त की थी। जबकि नरेन्द्र मोदी के जीवनी-लेखक ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है:

“उन दोनों की शादी जरूर हुई परन्तु वे दोनों एक साथ कभी नहीं रहे। शादी के कुछ बरसों बाद नरेन्द्र मोदी ने घर त्याग दिया और एक प्रकार से उनका वैवाहिक जीवन लगभग समाप्त-सा ही हो गया।”

पिछले चार विधान सभा चुनावों में अपनी वैवाहिक स्थिति पर खामोश रहने के बाद नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अविवाहित रहने की जानकारी देकर उन्होंने कोई पाप नहीं किया। नरेन्द्र मोदी के मुताबिक एक शादीशुदा के मुकाबले अविवाहित व्यक्ति भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जोरदार तरीके से लड़ सकता है क्योंकि उसे अपनी पत्नी, परिवार व बालबच्चों की कोई चिन्ता नहीं रहती। हालांकि नरेन्द्र मोदी ने शपथ पत्र प्रस्तुत कर जसोदाबेन को अपनी पत्नी स्वीकार किया है।

नरेंद्र मोदी का राजनीती मे आना

प्रारंभिक राजनैतिक जीवन

 मोदी ने दो साल तक भारत भर में यात्रा की, और कई धार्मिक केन्द्रों का दौरा किया। 1969 या 1970 वे गुजरात लौटे और अहमदाबाद चले गए। 1971 में वह आरएसएस के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। 1975 में देश भर में आपातकाल की स्थिति के समय उन्हें कुछ समय के लिए छिपना पड़ा। 1985 में वे बीजेपी से जुड़े और 2001 तक पार्टी पदानुक्रम के भीतर कई पदों पर कार्य किया, जहाँ से वे धीरे धीरे भाजपा में सचिव के पद पर पहुँचे।

वे गुजरात राज्य के 14वें मुख्यमन्त्री रहे। उन्हें उनके काम के कारण गुजरात की जनता ने लगातार 4 बार (2001 से 2014 तक) मुख्यमन्त्री चुना। गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त नरेन्द्र मोदी विकास पुरुष के नाम से जाने जाते हैं और वर्तमान समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं। टाइम पत्रिका ने मोदी को पर्सन ऑफ़ द ईयर 2013 के 42 उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है।

अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नरेन्द्र मोदी एक राजनेता और कवि हैं। वे गुजराती भाषा के अलावा हिन्दी में भी देशप्रेम से ओतप्रोत कविताएँ लिखते हैं।

उनके नेतृत्व में भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। एक सांसद के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी एवं अपने गृहराज्य गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से जीत दर्ज की। उनके राज में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एवं बुनियादी सुविधाओं पर खर्च तेजी से बढ़ा। उन्होंने अफसरशाही में कई सुधार किये तथा योजना आयोग को हटाकर नीति आयोग का गठन किया।

इसके बाद वर्ष 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने उनके नेतृत्त्व में दोबारा चुनाव लड़ा और इस बार पहले से भी ज्यादा बड़ी जीत हासिल हुई। पार्टी ने कुल 303 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा के समर्थक दलों यानी राजग को कुल 352 सीटें प्राप्त हुईं। 30 मई 2019 को शपथ ग्रहण कर नरेन्द्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमन्त्री बने।

2019 के आम चुनाव में उनकी पार्टी की जीत के बाद, उनके प्रशासन ने जम्मू और कश्मीर की विशेष राज्य का दर्जा को रद्द कर दिया। उनके प्रशासन ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, २०१९ भी पेश किया, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। मोदी अपने हिन्दू राष्ट्रवादी विश्वासों और 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनकी कथित भूमिका पर घरेलू और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का एक आँकड़ा बना हुआ है,  जिसे एक बहिष्कारवादी सामाजिक एजेण्डे के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया गया है। मोदी के कार्यकाल में, भारत ने लोकतान्त्रिक बैकस्लेडिंग का अनुभव किया।

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नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जीवन Narendra Modi Biography

एक वयस्क के रूप में मोदी की पहली ज्ञात राजनीतिक गतिविधि 1971 में थी जब वे अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में दिल्ली में भारतीय जनसंघ के सत्याग्रह में शामिल हुए, ताकि युद्ध के मैदान में प्रवेश किया जा सके। लेकिन इंदिरा गांधी की अगुवाई में केन्द्र सरकार ने मुक्तिवाहिनी को खुला समर्थन नहीं दिया और मोदी को थोड़े समय के लिए तिहाड़ जेल में डाल दिया गया।

नरेन्द्र जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे। इस प्रकार उनका जीवन संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में प्रारम्भ हुआ| उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलायी और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभायी। गुजरात में शंकरसिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेन्द्र मोदी की ही रणनीति थी।

अप्रैल 1990 में जब केन्द्र में मिली जुली सरकारों का दौर शुरू हुआ, मोदी की मेहनत रंग लायी, जब गुजरात में 1995 के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने बलबूते दो तिहाई बहुमत प्राप्त कर सरकार बना ली। इसी दौरान दो राष्ट्रीय घटनायें और इस देश में घटीं। पहली घटना थी सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथयात्रा जिसमें आडवाणी के प्रमुख सारथी की मूमिका में नरेन्द्र का मुख्य सहयोग रहा।

इसी प्रकार कन्याकुमारी से लेकर सुदूर उत्तर में स्थित काश्मीर तक की मुरली मनोहर जोशी की दूसरी रथ यात्रा भी नरेन्द्र मोदी की ही देखरेख में आयोजित हुई। इसके बाद शंकरसिंह वाघेला ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमन्त्री बना दिया गया और नरेन्द्र मोदी को दिल्ली बुला कर भाजपा में संगठन की दृष्टि से केन्द्रीय मन्त्री का दायित्व सौंपा गया।

1995 में राष्ट्रीय मन्त्री के नाते उन्हें पाँच प्रमुख राज्यों में पार्टी संगठन का काम दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। 1998 में उन्हें पदोन्नत करके राष्ट्रीय महामन्त्री (संगठन) का उत्तरदायित्व दिया गया। इस पद पर वह अक्टूबर 2001 तक काम करते रहे। भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2001 में केशुभाई पटेल को हटाकर गुजरात के मुख्यमन्त्री पद की कमान नरेन्द्र मोदी को सौंप दी।

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गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप मे नरेंद्र मोदी

2001 में केशुभाई पटेल (तत्कालीन मुख्यमंत्री) की सेहत बिगड़ने लगी थी और भाजपा चुनाव में कई सीट हार रही थी।  इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री के रूप में मोदी को नए उम्मीदवार के रूप में रखते हैं। हालांकि भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मोदी के सरकार चलाने के अनुभव की कमी के कारण चिंतित थे।

मोदी ने पटेल के उप मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया और आडवाणी व अटल बिहारी वाजपेयी से बोले कि यदि गुजरात की जिम्मेदारी देनी है तो पूरी दें अन्यथा न दें। 3 अक्टूबर 2001 को यह केशुभाई पटेल के जगह गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही उन पर दिसम्बर 2002 में होने वाले चुनाव की पूरी जिम्मेदारी भी थी।

2001-02 तक मोदी

नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री का अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया। इसके बाद मोदी ने राजकोट विधानसभा चुनाव लड़ा। जिसमें काँग्रेस पार्टी के आश्विन मेहता को 14,728 मतों से हराया था।

नरेन्द्र मोदी अपनी विशिष्ट जीवन शैली के लिये समूचे राजनीतिक हलकों में जाने जाते हैं। उनके व्यक्तिगत स्टाफ में केवल तीन ही लोग रहते हैं, कोई भारी-भरकम अमला नहीं होता। लेकिन कर्मयोगी की तरह जीवन जीने वाले मोदी के स्वभाव से सभी परिचित हैं इस नाते उन्हें अपने कामकाज को अमली जामा पहनाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आती।

उन्होंने गुजरात में कई ऐसे हिन्दू मन्दिरों को भी ध्वस्त करवाने में कभी कोई कोताही नहीं बरती जो सरकारी कानून कायदों के मुताबिक नहीं बने थे। हालाँकि इसके लिये उन्हें विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठनों का कोपभाजन भी बनना पड़ा, परन्तु उन्होंने इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं की; जो उन्हें उचित लगा करते रहे।

वे एक लोकप्रिय वक्ता हैं, जिन्हें सुनने के लिये बहुत भारी संख्या में श्रोता आज भी पहुँचते हैं। कुर्ता-पायजामा व सदरी के अतिरिक्त वे कभी-कभार सूट भी पहन लेते हैं। अपनी मातृभाषा गुजराती के अतिरिक्त वह हिन्दी में ही बोलते हैं।

मोदी के नेतृत्व में २०१२ में हुए गुजरात विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। भाजपा को इस बार ११५ सीटें मिलीं।

नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई गुजरात के विकास की योजनाएँ

मुख्यमन्त्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के विकास  के लिये जो महत्वपूर्ण योजनाएँ प्रारम्भ कीं व उन्हें क्रियान्वित कराया, उनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

पंचामृत योजना– राज्य के एकीकृत विकास की पंचायामी योजना,

सुजलाम् सुफलाम् – राज्य में जलस्रोतों का उचित व समेकित उपयोग, जिससे जल की बर्बादी को रोका जा सके,

कृषि महोत्सव – उपजाऊ भूमि के लिये शोध प्रयोगशालाएँ,

चिरंजीवी योजना – नवजात शिशु की मृत्युदर में कमी लाने हेतु,

मातृ-वन्दना – जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु,

बेटी बचाओ – भ्रूण-हत्या व लिंगानुपात पर अंकुश हेतु,

ज्योतिग्राम योजना – प्रत्येक गाँव में बिजली पहुँचाने हेतु,

कर्मयोगी अभियान – सरकारी कर्मचारियों में अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा जगाने हेतु,

कन्या कलावाणी योजना – महिला साक्षरता व शिक्षा के प्रति जागरुकता,

बालभोग योजना – निर्धन छात्रों को विद्यालय में दोपहर का भोजन,

नरेंद्र मोदी का वनबन्धु विकास कार्यक्रम

उपरोक्त विकास योजनाओं के अतिरिक्त मोदी ने आदिवासी व वनवासी क्षेत्र के विकास हेतु गुजरात राज्य में वनबन्धु विकास[67] हेतु एक अन्य दस सूत्री कार्यक्रम भी चला रखा है जिसके सभी १० सूत्र निम्नवत हैं:

१-पाँच लाख परिवारों को रोजगार

२-उच्चतर शिक्षा की गुणवत्ता

३-आर्थिक विकास

४-स्वास्थ्य

५-आवास

६-साफ स्वच्छ पेय जल

७-सिंचाई

८-समग्र विद्युतीकरण

९-प्रत्येक मौसम में सड़क मार्ग की उपलब्धता

१०-शहरी विकास।

श्यामजीकृष्ण वर्मा की अस्थियों का भारत में संरक्षण

नरेन्द्र मोदी ने प्रखर देशभक्त एवं आर्यसमाज के संस्थापक सवामी दयानंद सरस्वती के शिष्य श्यामजी कृष्ण वर्मा व उनकी पत्नी भानुमती की अस्थियों को भारत की स्वतन्त्रता के ५५ वर्ष बाद २२ अगस्त २००३ को स्विस सरकार से अनुरोध करके जिनेवा से स्वदेश वापस मँगाया और माण्डवी (श्यामजी के जन्म स्थान) में क्रान्ति-तीर्थ के नाम से एक पर्यटन स्थल बनाकर उसमें उनकी स्मृति को संरक्षण प्रदान किया। मोदी द्वारा १३ दिसम्बर २०१० को राष्ट्र को समर्पित इस क्रान्ति-तीर्थ को देखने दूर-दूर से पर्यटक गुजरात आते हैं। गुजरात सरकार का पर्यटन विभाग इसकी देखरेख करता है।

नरेंद्र मोदी से जुड़े विवाद

27 फ़रवरी 2002 को अयोध्या से गुजरात वापस लौट कर आ रहे कारसेवकों को गोधरा स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में मुसलमानों की हिंसक भीड़ द्वारा आग लगा कर जिन्दा जला दिया गया। इस हादसे में 59 कारसेवक मारे गये थे। रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना की प्रतिक्रिया स्वरूप समूचे गुजरात में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क उठे। मरने वाले 1180 लोगों में अधिकांश संख्या अल्पसंख्यकों की थी।

इसके लिये न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया। कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों ने नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की माँग की। मोदी ने गुजरात की दसवीं विधानसभा भंग करने की संस्तुति करते हुए राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। परिणामस्वरूप पूरे प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। राज्य में दोबारा चुनाव हुए जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने मोदी के नेतृत्व में विधान सभा की कुल १८२ सीटों में से १२७ सीटों पर जीत हासिल की।

अप्रैल २००९ में भारत के उच्चतम न्यायालय ने विशेष जाँच दल भेजकर यह जानना चाहा कि कहीं गुजरात के दंगों में नरेन्द्र मोदी की साजिश तो नहीं। यह विशेष जाँच दल दंगों में मारे गये काँग्रेसी सांसद ऐहसान ज़ाफ़री की विधवा ज़ाकिया ज़ाफ़री की शिकायत पर भेजा गया था। दिसम्बर 2010 में उच्चतम न्यायालय ने एस॰ आई॰ टी॰ की रिपोर्ट पर यह फैसला सुनाया कि इन दंगों में नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़़ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

उसके बाद फरवरी 2011 में टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह आरोप लगाया कि रिपोर्ट में कुछ तथ्य जानबूझ कर छिपाये गये हैं।और सबूतों के अभाव में नरेन्द्र मोदी को अपराध से मुक्त नहीं किया जा सकता।

इंडियन एक्सप्रेस ने भी यह लिखा कि रिपोर्ट में मोदी के विरुद्ध साक्ष्य न मिलने की बात भले ही की हो किन्तु अपराध से मुक्त तो नहीं किया। द हिन्दू में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार नरेन्द्र मोदी ने न सिर्फ़ इतनी भयंकर त्रासदी पर पानी फेरा अपितु प्रतिक्रिया स्वरूप उत्पन्न गुजरात के दंगों में मुस्लिम उग्रवादियों के मारे जाने को भी उचित ठहराया।

भारतीय जनता पार्टी ने माँग की कि एस॰ आई॰ टी॰ की रिपोर्ट को लीक करके उसे प्रकाशित करवाने के पीछे सत्तारूढ़ काँग्रेस पार्टी का राजनीतिक स्वार्थ है इसकी भी उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच होनी चाहिये।

सुप्रीम कोर्ट ने बिना कोई फैसला दिये अहमदाबाद के ही एक मजिस्ट्रेट को इसकी निष्पक्ष जाँच करके अविलम्ब अपना निर्णय देने को कहा। अप्रैल 2012 में एक अन्य विशेष जाँच दल ने फिर ये बात दोहरायी कि यह बात तो सच है कि ये दंगे भीषण थे परन्तु नरेन्द्र मोदी का इन दंगों में कोई भी प्रत्यक्ष हाथ नहीं।

7 मई 2012 को उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जज राजू रामचन्द्रन ने यह रिपोर्ट पेश की कि गुजरात के दंगों के लिये नरेन्द्र मोदी पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 153 ए (1) (क) व (ख), 153 बी (1), 166 तथा 505 (2) के अन्तर्गत विभिन्न समुदायों के बीच बैमनस्य की भावना फैलाने के अपराध में दण्डित किया जा सकता है।

हालांकि रामचन्द्रन की इस रिपोर्ट पर विशेष जाँच दल (एस०आई०टी०) ने आलोचना करते हुए इसे दुर्भावना व पूर्वाग्रह से परिपूर्ण एक दस्तावेज़ बताया।

26 जुलाई 2012 को नई दुनिया के सम्पादक शाहिद सिद्दीकी को दिये गये एक इण्टरव्यू में नरेन्द्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा – “2004 में मैं पहले भी कह चुका हूँ, 2002 के साम्प्रदायिक दंगों के लिये मैं क्यों माफ़ी माँगूँ? यदि मेरी सरकार ने ऐसा किया है तो उसके लिये मुझे सरे आम फाँसी दे देनी चाहिये।”

मुख्यमन्त्री ने गुरुवार को नई दुनिया से फिर कहा- “अगर मोदी ने अपराध किया है तो उसे फाँसी पर लटका दो। लेकिन यदि मुझे राजनीतिक मजबूरी के चलते अपराधी कहा जाता है तो इसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है।”

यह कोई पहली बार नहीं है जब मोदी ने अपने बचाव में ऐसा कहा हो। वे इसके पहले भी ये तर्क देते रहे हैं कि गुजरात में और कब तक गुजरे ज़माने को लिये बैठे रहोगे? यह क्यों नहीं देखते कि पिछले एक दशक में गुजरात ने कितनी तरक्की की? इससे मुस्लिम समुदाय को भी तो फायदा पहुँचा है।

लेकिन जब केन्द्रीय क़ानून मन्त्री सलमान खुर्शीद से इस बावत पूछा गया तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया – “पिछले बारह वर्षों में यदि एक बार भी गुजरात के मुख्यमन्त्री के ख़िलाफ़़ एफ॰ आई॰ आर॰ दर्ज़ नहीं हुई तो आप उन्हें कैसे अपराधी ठहरा सकते हैं? उन्हें कौन फाँसी देने जा रहा है?”

बाबरी मस्जिद के लिये पिछले 45 सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे 92 वर्षीय मोहम्मद हाशिम अंसारी के मुताबिक भाजपा में प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के प्रान्त गुजरात में सभी मुसलमान खुशहाल और समृद्ध हैं। जबकि इसके उलट कांग्रेस हमेशा मुस्लिमों में मोदी का भय पैदा करती रहती है।

सितंबर 2014 की भारत यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने कहा कि नरेंद्र मोदी को 2002 के दंगों के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए क्योंकि वह उस समय मात्र एक ‘पीठासीन अधिकारी’ थे जो ‘अनगिनत जाँचों’ में पाक साफ साबित हो चुके हैं।

कमजोर अर्थव्यवस्था

नरेंद्र मोदी की सरकार अच्छी आर्थिक वृद्धि के लिए जानी जाती है, लेकिन 2018 से जीएसटी और 2017 के विमुद्रीकरण जैसे कदमों के कारण, मोदी सरकार के अधीन अर्थव्यवस्था कम रही है।

 

नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप मे पहला कार्यकाल 

प्रथम शपथ ग्रहण समारोह

नरेन्द्र मोदी का 26 मई 2014 से भारत के 15वें प्रधानमन्त्री का कार्यकाल राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित शपथ ग्रहण के पश्चात प्रारम्भ हुआ। मोदी के साथ 45 अन्य मन्त्रियों ने भी समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सहित कुल 46 में से 36 मन्त्रियों ने हिन्दी में जबकि 10 ने अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की। समारोह में विभिन्न राज्यों और राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों सहित दक्षेस देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमन्त्रित किया गया। इस घटना को भारतीय राजनीति की राजनयिक कूटनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल का मंत्रिमंडल

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने नृपेंद्र मिश्रा को अपने प्रधान सचिव और अजीत डोभाल को कार्यालय में अपने पहले सप्ताह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में नियुक्त किया। उन्होंने आईएएस अधिकारी ए.के. शर्मा और भारतीय वन सेवा अधिकारी भारत लाल प्रधानमन्त्री कार्यालय (पीएमओ) में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

दोनों अधिकारी मुख्यमन्त्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान गुजरात में मोदी की सरकार का हिस्सा थे। 31 मई 2014 को, प्रधानमन्त्री मोदी ने सभी मौजूदा मन्त्रियों के समूह (GoMs) और मन्त्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (EGoMs) को समाप्त कर दिया। पीएमओ के एक बयान में बताया गया है, “यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा और प्रणाली में अधिक जवाबदेही की शुरूआत करेगा।

मन्त्रालय और विभाग अब ईजीओएम और गोम्स के समक्ष लम्बित मुद्दों पर कार्रवाई करेंगे और मन्त्रालयों के स्तर पर उचित निर्णय लेंगे। विभागों को ही “। UPA-II सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 68 GoM और 14 EGoM की स्थापना की थी, जिनमें से 9 EGoM और 21 GoM को नई सरकार द्वारा विरासत में मिली थी। भारतीय मीडिया द्वारा इस कदम को “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की मोदी की नीति के साथ संरेखण में बताया गया।

इंडियन एक्सप्रेस ने कहा कि GoMs और EGoMs “पिछली यूपीए सरकार के दौरान एक प्रतीक और नीतिगत पक्षाघात का एक साधन” बन गए थे। टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने नई सरकार के फैसले को “निर्णय लेने में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल के अधिकार को बहाल करने और मन्त्रिस्तरीय योग्यता सुनिश्चित करने के लिए एक कदम” के रूप में वर्णित किया।

ग्रामीण विकास, पंचायती राज के प्रभारी और पेयजल और स्वच्छता विभागों के नए नियुक्त कैबिनेट मन्त्री गोपीनाथ मुंडे की 3 जून 2014 को दिल्ली में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई। कैबिनेट मन्त्री नितिन गडकरी, जो सड़क परिवहन के प्रभारी हैं। 4 जून को मुण्डे के पोर्टफोलियो की देखभाल के लिए राजमार्गों और शिपिंग को सौंपा गया था।

10 जून 2014 को, सरकार को नीचा दिखाने के लिए एक अन्य कदम में, मोदी ने मन्त्रिमण्डल की चार स्थायी समितियों को समाप्त कर दिया। उन्होंने पाँच महत्वपूर्ण कैबिनेट समितियों के पुनर्गठन का भी निर्णय लिया। इनमें कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) शामिल है जो सभी उच्च-स्तरीय रक्षा और सुरक्षा मामलों को संभालती है, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) जो राष्ट्रपति को सभी वरिष्ठ नौकरशाही नियुक्तियों और पोस्टिंग की सिफारिश करती है, कैबिनेट कमिटी ऑन पोलिस अफेयर्स (CCPA) जो एक प्रकार की छोटी कैबिनेट और संसदीय मामलों की मन्त्रिमण्डलीय समिति है।

प्रधानमन्त्री और मन्त्रिपरिषद ने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद, 24 मई 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति ने इस्तीफे स्वीकार कर लिए और मन्त्रिपरिषद से अनुरोध किया कि वे नई सरकार के पद सम्भालने तक जारी रहें।

मोदी सरकार द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपाय

2017 में इज़राइल के प्रधानमंत्री, बेंजामिन नेतन्याहू और मोदी ने तेल अवीव, इज़राइल में प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का दौरा किया।

भ्रष्टाचार से सम्बन्धित विशेष जाँच दल (SIT) की स्थापना।

योजना आयोग की समाप्ति की घोषणा।

समस्त भारतीयों के अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में समावेशन हेतु प्रधानमंत्री जन धन योजना का आरम्भ।

रक्षा उत्पादन क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति।

45% का कर देकर काला धन घोषित करने की छूट।

सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिसों की स्वीकृति।

रेल बजट प्रस्तुत करने की प्रथा की समाप्ति।

काले धन तथा समान्तर अर्थव्यवस्था को समाप्त करने के लिये 8 नवम्बर 2016 से ५०० तथा १००० के प्रचलित नोटों को अमान्य करना।

भारत के अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध

ब्रिक्स (BRICS) के अन्य नेताओं के साथ नरेन्द्र मोदी

मुख्य लेख: नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति

शपथग्रहण समारोह में समस्त दक्षेस देशों को आमन्त्रण।

सर्वप्रथम विदेश यात्रा के लिए भूटान का चयन।

ब्रिक्स सम्मेलन में नए विकास बैंक की स्थापना।

नेपाल यात्रा में पशुपतिनाथ मन्दिर में पूजा।

अमेरिका व चीन से पहले जापान की यात्रा।

पाकिस्तान को अन्तरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग करने में सफल।

जुलाई 2017 में इजराइल की यात्रा, इजराइल के साथ सम्बन्धों में नये युग का आरम्भ।

सूचना प्रौद्योगिकी

डिजिटल इंडिया 1 जुलाई 2015 को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार की सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से ऑनलाइन बुनियादी ढाँचे में सुधार करके और इण्टरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने या देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए नागरिकों को उपलब्ध कराया जाए।

इस पहल में ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इण्टरनेट नेटवर्क से जोड़ने की योजना शामिल है।डिजिटल इण्डिया में तीन मुख्य घटक होते हैं: सुरक्षित और स्थिर डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विकास, सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से वितरित करना, और सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता।

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता

भारत के प्रधानमन्त्री बनने के बाद 2 अक्टूबर 2014 को नरेन्द्र मोदी ने देश में साफ-सफाई को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत अभियान का शुभारम्भ किया। उसके बाद पिछले साढ़े चार वर्षों में मोदी सरकार ने कई ऐसी पहलें की जिनकी जनता के बीच खूब चर्चा रही। स्वच्छता भारत अभियान भी ऐसी ही पहलों में से एक हैं।

सरकार ने जागरुकता अभियान के तहत लोगों को सफाई के लिए प्रेरित करने की दिशा में कदम उठाए। देश को खुले में शौच मुक्त करने के लिए भी अभियान के तहत प्रचार किया। साथ ही देश भर में शौचालयों का निर्माण भी कराया गया। सरकार ने देश में साफ सफाई के खर्च को बढ़ाने के लिए स्वच्छ भारत चुंगी (सेस) की भी शुरुआत की।

स्वच्छ भारत मिशन का प्रतीक गांधी जी का चश्मा रखा गया और साथ में एक ‘एक कदम स्वच्छता की ओर’ टैग लाइन भी रखी गई।

स्वच्छ भारत अभियान के सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। इस अभियान का उद्देश्य पाँच वर्ष में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि बापू की 150वीं जयन्ती को इस लक्ष्य की प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके। स्वच्छ भारत अभियान सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे के श्रमदान के लिए लोगों को प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने मृदुला सिन्‍हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अम्‍बानी, कमल हसन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा और तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा की टीम जैसी नौ नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया कि वे भी स्‍वच्‍छ भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें।

लोगों से कहा गया कि वे सफाई अभियानों की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें और अन्‍य नौ लोगों को भी अपने साथ जोड़ें ताकि यह एक शृंखला बन जाए। आम जनता को भी सोशल मीडिया पर हैश टैग #MyCleanIndia लिखकर अपने सहयोग को साझा करने के लिए कहा गया।

एक कदम स्वच्छता की ओर : मोदी सरकार ने एक ऐसा रचनात्मक और सहयोगात्मक मंच प्रदान किया है जो राष्ट्रव्यापी आन्दोलन की सफलता सुनिश्चित करता है। यह मंच प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों और संगठनों के अभियान संबंधी प्रयासों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

कोई भी व्यक्ति, सरकारी संस्था या निजी संगठन अभियान में भाग ले सकते हैं। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को उनके दैनिक कार्यों में से कुछ घण्टे निकालकर भारत में स्वच्छता सम्बन्धी कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

स्वच्छता ही सेवा : प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 15 सितम्बर 2018 को ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान आरम्भ किया और जन-मानस को इससे जुड़ने का आग्रह किया। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150 जयन्ती वर्ष के औपचारिक शुरुआत से पहले 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले मोदी ने समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 2,000 लोगों को पत्र लिख कर इस सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमन्त्रित किया, ताकि इस अभियान को सफल बनाया जा सके।

मोदी के साथ इजराइल के १०वें प्रेसिडेन्ट तथा रक्षाबलों के प्रमुख

रक्षा नीति

भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक बनाने एवं उनका विस्तार करने के लिये मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने रक्षा पर खर्च को बढ़ा दिया है। सन 2015 में रक्षा बजट 11% बढ़ा दिया गया। सितम्बर 2015 में उनकी सरकार ने समान रैंक समान पेंशन (वन रैंक वन पेन्शन) की बहुत लम्बे समय से की जा रही माँग को स्वीकार कर लिया।

मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर भारत के नागा विद्रोहियों के साथ शान्ति समझौता किया जिससे 1950 के दशक से चला आ रहा नागा समस्या का समाधान निकल सके।

२९ सितम्बर, २०१६ को नियन्त्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक।[158]

सीमा पर चीन की मनमानी का कड़ा विरोध और प्रतिकार।[159] (डोकलाम विवाद 2017 देखें)

26 फरवरी 2019 को, मोदी पाकिस्तान में बालाकोट आतंकवादी शिविर में हवाई हमले को अधिकृत करता है।[160]

घरेलू नीति

हजारों एन जी ओ का पंजीकरण रद्द करना।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को ‘अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय’ न मानना।

तीन बार तलाक कहकर तलाक देने के विरुद्ध निर्णय।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम।

आमजन से जुड़ने की मोदी की पहल

१५ अगस्त २०१९ को स्कूली बच्चों से मिलते हुए

०१ दिसम्बर २०१४ को कोहिमा में एक उत्सव में सम्मिलित नरेन्द्र मोदी। नागालैण्ड के मुख्यमन्त्री टी आर जेलियाङ भी मंच पर दिख रहे हैं।

देश की आम जनता की बात जाने और उन तक अपनी बात पहुँचाने के लिए नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम के माध्यम से मोदी ने लोगों के विचारों को जानने की कोशिश की और साथ ही साथ उन्होंने लोगों से स्वच्छता अभियान सहित विभिन्न योजनाओं से जुड़ने की अपील की।

अन्य

70 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों एवं विधायकों को मन्त्रिपद न देने का कड़ा निर्णय।

2019 लोक सभा चुनाव

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार

13 अक्टूबर 2018 को वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी ने प्रधान मंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किया था | पार्टी के मुख्य प्रचारक भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह थे। मोदी ने आम चुनाव से पहले मैं भी चौकीदार हूं अभियान की शुरुआत की। वर्ष 2018 में, आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे के मामले को लेकर एनडीए से अलग पार्टी का दूसरा, तेलुगु देशम पार्टी का विभाजन हो गया।

नरेंद्र मोदी द्वारा अपने पहले प्रीमियर में किए गए विकास और शानदार काम को देखते हुए उन्हें 2019 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री के लिए उम्मीदवार और मुख्य चेहरे के रूप में फिर से घोषित किया गया था।

लोक सभा चुनाव २०१९ में मोदी की स्थिति

पूरे 2019 के चुनाव अभियान में, नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधान मंत्री के एकमात्र चेहरे के रूप में चित्रित किया। इसके कारण, चुनाव को लोकतंत्र में टकराव के रूप में देखा गया और इसे एकदलीय प्रणाली का भोर कहा गया। विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के लिए कोई मजबूत चेहरा भी नहीं था। कई हिंदू नेताओं और संतों ने अपने हिंदुत्व के आदर्शों के कारण अपने अनुयायियों से नरेंद्र मोदी को वोट देने का आग्रह किया।

कई बॉलीवुड अभिनेता और अभिनेताओं जैसे विवेक ओबेरॉय, कंगना रनौत, हंसराज हंस, अनुपम खेर, पायल रोहतगी और अन्य ने भी लोगों से आगामी चुनाव में नरेंद्र मोदी को वोट देने का आग्रह किया। अनुराग कश्यप, नसीरुद्दीन शाह सहित बॉलीवुड के कई अभिनेताओं और अभिनेत्रियों और अन्य लोगों ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए जनता से नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोट करने के लिए कहा।

देश में हिंदू राष्ट्रवाद के उदय के कारण मुसलमानों और ईसाइयों जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की चिंता पर विपक्ष ने भी मोदी की आलोचना की। मोदी ने रक्षा की बात की और राष्ट्र सुरक्षा को चुनाव प्रचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक के रूप में देखा गया, खासकर पुलवामा हमले के बाद और बालाकोट हवाई हमले के जवाबी हमले को मोदी प्रशासन की उपलब्धि के रूप में गिना गया।

परिणाम

मोदी ने वाराणसी से उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने समाजवादी पार्टी की शालिनी यादव को हराकर सीट जीती, जिन्होंने सपा-बसपा गठबंधन को 479,505 मतों के अंतर से हराया। गठबंधन के बाद दूसरी बार चुनाव जीतने के बाद मोदी को दूसरी बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा सर्वसम्मति से प्रधान मंत्री नियुक्त किया गया, अकेले भाजपा के साथ 303 सीटें जीतकर लोकसभा में 353 सीटें हासिल कीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूसरा कार्यकाल

दूसरा शपथ ग्रहण समारोह

राष्ट्रपति, राम नाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति, एम। वेंकैया नायडू, प्रधान मंत्री, नरेंद्र मोदी और अन्य मंत्रियों के साथ राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह के बाद,

भारतीय जनता पार्टी के संसदीय नेता नरेंद्र मोदी ने ३० मई २०१९ को भारत के १५ वें प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के बाद अपना कार्यकाल शुरू किया। मोदी के साथ कई अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली।

दूसरा कैबिनेट

भारत गणराज्य का 22 वां मंत्रालय, नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद है जिसका गठन 2019 के आम चुनाव के बाद किया गया था जो 2019 में सात चरणों में हुआ था। चुनाव के परिणाम 23 मई 2019 को घोषित किए गए थे। इसने 17 वीं लोकसभा का गठन किया। रायसीना हिल में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया।

इस समारोह में BIMSTEC देशों के प्रमुखों को सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।[b] उनकी दूसरी कैबिनेट में 54 मंत्री शामिल थे और वर्तमान में 51 मंत्री हैं। इससे पहले अरविंद सावंत भी कैबिनेट में थे लेकिन गठबंधन से शिवसेना के टूटने के कारण इस्तीफा दे दिया।

  केंद्रीय मंत्री, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने भी किसान बिल विरोध के कारण गठबंधन छोड़ दिया था। 8 अक्टूबर 2020 को राम विलास पासवान का निधन हो गया और बाद में उनके बेटे, चिराग पासवान ने जद (यू) के साथ खराब संबंध के कारण गठबंधन छोड़ दिया।

नरेंद्र मोदी का बर्थडे कब है When is narendra modi Birthday?

Narendra modi का बर्थडे 17 सितम्बर को है। नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को हुआ था।

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