सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 568 देशी रियासतों को भारत मे कैसे मिलाया? National unity day 2021 Special

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जब देश आजाद हुआ तब अंग्रेजों ने भारत के दो टुकड़े तो तो किये ही भारत और पाकिस्तान साथ में देश के अंदर 568 रियासतें थी, जिन्हें अंग्रेज नहीं चाहते थे कि यह भारत में शामिल हो। आइए जानते हैं सरदार वल्लभभाई पटेल ने इन रियासतों को भारत में कैसे मिलाया, और क्या है पूरी कहानी जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के भारत में मिलाए जाने की?

राष्ट्रीय एकता दिवस 2021 विशेष National unity day 2021 Special ( National unity day in Hindi )

राष्ट्रीय एकता दिवस एक परिचय – राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। एक राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत 2014 से हुई। 31 अक्टूबर 2021 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 145 वा जन्मदिवस है। सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के पहले गृहमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, वकील एवं सफल राजनेता रहे हैं।

National unity day 2021 special
राष्ट्रीय एकता दिवस 2021 विशेष
Sardar Vallabhbhai patel Jayanti special in Hindi
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568 देशी रियासतो के भारत मे मिलाने का इतिहास History of merger of 568 princely states in India ( National unity day 2021 in Hindi )

अंग्रेजों की शुरू से ही नीति रही थी फूट डालो राज्य करो, अंग्रेजों ने भारत को पूरी तरह लूटा और हिंदुस्तान और पाकिस्तान मे देश का बंटवारा किया। आजादी के समय देश में 568 ऐसी और देशी रियासत जो भारत का हिस्सा नहीं थी। अंग्रेजी चाहते थे कि यह 56867 रियासतें भारत का हिस्सा ना बने, इसके लिए अंग्रेजों ने इन रियासतों के राजाओं और राजकुमारों के बातचीत की किए हुए अपने रियासत को भारत में शामिल ना करें, और उन्हें भविष्य के लिए डर्बी पैदा किया, कि इसके बाद आपके राज्य का क्या होगा।

उन रियासतों में से तीन को छोड़कर सारे राजा भारत में शामिल होना चाहते थे और वे स्वेच्छा से भारत में शामिल हो गए लेकिन तीन ऐसी रियासतें थी जिसके राजा चाहते थे, कि पाकिस्तान में शामिल हूं। इनके नाम है – जम्मू और कश्मीर जूनागढ़ और हैदराबाद।

जूनागढ़ का भारत मे विलय ( Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti 2021 Special )

जूनागढ़ में एक मुस्लिम शासक हुआ करता था, जो अंग्रेजों के भड़काऊ में आकर जूनागढ़ को पाकिस्तान में में शामिल करना चाहता था। जबकि वहां की जनता इसके विरोध में थी जनता चाहती थी कि जूनागढ़ भारत में शामिल हो।

जम्मू और कश्मीर का भारत मे विलय, राष्ट्रीय एकता दिवस 2021 Accession of Jammu and Kashmir with India (National Unity day in India )

अंग्रेजो ने जम्मू और कश्मीर के राजा हरिसिंह को भी भड़का दिया था, की वो भारत मे विलय न हो। राजा हरिसिंह भी अंग्रेजो की बातो मे आ कर पुते जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान मे मिलाना चाहते थे। तब तक पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर पर हमला कर दिया, और देखते ही देखते श्रीनगर तक आप गए। तब राजा हरिसिंह ने अपने प्रधानमंत्री को नई दिल्ली भेजा, फिर जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री ने सरदार बल्लभ भाई पटेल से बातचीत की आप जम्मू कश्मीर की सहायता करें।

तब सरदार पटेल ने जम्मू और कश्मीर को भारत में विलय की शर्त रखी, तब जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री ने कहा पहले आप जम्मू-कश्मीर की सहायता करें बाद में शर्तें देखी जाएंगी। इस पर सरदार पटेल ने कहा जब तक आप किसी देश से जुड़ेंगे नहीं तब तक कोई आप की सहायता कैसे कर सकता है, भारत की सेना भारतीय सीमा की हिफाजत के लिए है। तब का प्रधानमंत्री जम्मू और कश्मीर गया और राजा हरिसिंह से बताया की जब तक जम्मू भारत मे नहीं विलय होगा तब तक भारत सहायता नहीं करेगा। उसके बाद जा कर राजा हरिसिंह ने भारत मे बिना किसी शर्त के विलय के लिए हस्ताक्षर किया।

उसके बाद भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना ने जम्मू कश्मीर जा कर वहाँ से पाकिस्तानी सेना को खड़ेदा और न सिर्फ खड़ेदा बल्कि पाकिस्तान के अंदर तक चले गए। लेकिन वहाँ पर एक गलती भारत के प्रधानमंत्री ने बिना किसी को बताये, बिना कैबिनेट की बैठक किये यूद्ध विराम की घोषणा कर दि। यह घोषणा जवाहर लाल नेहरू ने All India Radio पर दिल्ली से की। और यह कहा की जम्मू और कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र संघ सुलझायेंगा।

हैदराबाद का भारत मे विलय Accession of Hyderabad With India ( National Unity day In Hindi )

उस समय हैदराबाद में निजाम का शासन था। निजाम चाहता था कि हैदराबाद पाकिस्तान में विलय हुआ और वहां की जनता इसके खिलाफ थी। हैदराबाद का भारत में विलय कराने के लिए अंदर से और भी प्रयास किए गए थे। समाजवाद के कुछ नेता जैसे जयप्रकाश नारायण, आर्य समाज के लोग, और भी कई लोगों ने हैदराबाद की जनता को भारत में विलय के लिए मत जुटाया। जिसमें 90% लोग हैदराबाद को भारत में विलय करना चाहते थे। लेकिन निजाम इसके खिलाफ था। तब सरदार पटेल ने निजाम से कहा – तुम्हें पाकिस्तान जाना है तो जाओ हैदराबाद भारत में विलय होगा। उसके बाद निजाम पाकिस्तान चला गया और हैदराबाद भारत का हिस्सा बना।

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