शिवमहापुराण के अनुसार शिवरात्रि की कथा MahaShivratri 2022

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शिवरात्रि हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है, इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। की कथा पुराणों के अनुसार अलग-अलग बताई जाती है लेकिन भगवान शिव को समर्पित शिव महापुराण के अनुसार शिवरात्रि की कथा क्या है आइये जानते हैं

आँखेटक और हिरणी के परिवार की कथा MahaShivratri 2022

एक समय की बात है एक जंगल में एक शिकारी अपने पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। वे अत्यंत निर्धन थे उनके जीविका का मुख्य साधन शिकार ही था। एक बार की बात है जब आखेटक शिकार हो गया और उसे कोई पशु हाथ ना लगा, जब वह अपने घर आया तो उसे देख उसके पुत्र प्रसन्न हुए कि पिता कुछ शिकार लाए होंगे परंतु वे निराश हुए।

पत्नी के कहने पर आखेटक दोबारा शिकार के लिए जंगल में जाता है। जंगल में जाने के बाद वह एक पेड़ पर छुप कर शिकार के लिए बैठ जाता है। आखेटक जिस पेड़ के ऊपर बैठा होता है उसी पेड़ के नीचे एक भगवान शिव का शिवलिंग होता है जिसे आखेटक नहीं देख पाता है

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Mahashivratri 2022

जंगल में जाने के बाद कुछ देर बाद उसे एक हिरणी दिखाई देती है, को मारने के लिए अपने धनुष पर बाण चढ़ाता है लेकिन उसे उसे हिरणी पर दया आ जाती है और वह रुक जाता है। तभी हिरणी बोलती है, हे आखेटक तुम मुझे मत मारो मैं यहां अपने बहन को खोजने आई थी। मैं घर जाकर अपने बच्चों और पति से मिल कर आती हूं तब तुम मुझे अपना शिकार बना सकते हो। आखेटक को पहले तो हीरोइन की बातों पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन उसने बाद में कहा ठीक है मैं तुम पर विश्वास करता हूं तुम जाओ और जल्दी आना।

हिरणी अपने घर को चली जाती है तभी कुछ देर बाद उसे हीरोइन की बहन आखेटक के सामने से गुजरती है जिसे देखा कटक अपने धनुष बाण चलाता है तभी इतनी बोलती है हे आखेटक मुझे मत मारो मैं अपने बहन को ढूंढने आई थी मुझे लगता है शायद उसे किसी जानवर ने खा लिया वह वह मिल नहीं रही तब आखेटक उसे आपा बिजी बताता है और बोलता है वह घर गई है। तो फिर नहीं बोलती है यह आखिर तक तुम मुझे मत मारो ना घर जाकर अपनी बहन से मिलकर देर में आती हूं तब मुझे तुम अपना शिकार बना सकते हो। आखेटक पहले तो मना करता है फिर मान जाता है और उसे जाने देता है।

कुछ देर बाद ही रानी का पति आता है और वह आखेटक को देख उससे पूछता है कि क्या तुमने मेरी पत्नी को देखा या तुमने उसे मार दिया क्योंकि मैं कब से खोज रहा हूं वह मिल नहीं रही है, इस प्राकृतिक बोलता है नहीं नहीं वह घर गई है और अभी कुछ देर में आएगी मैं तुम्हारी पत्नी को तो जाने दिया लेकिन मैं तुम्हें नहीं जाने दूंगा मैं तुम्हें मार कर अपना शिकार बना लूंगा।

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आदित्य की बात सुनकर हीरो घबरा जाता है और आखेटक से विनती करता है कि मुझे जाने दो मैं घर जा अपनी बीवी और बच्चों से मिलकर दोबारा मैं तुम्हारे पास आ जाऊंगा कुछ देर में, आर्केस्ट्रा करता है मैं तुम्हें मुर्ख दीखता हूं क्या मैंने पहले ही तुम्हारी बीवी और उसकी बहन को जाने दिया है अब मैं किसी को नहीं जाने दूंगा मैं तुम्हें मार कर अपना शिकार बना लूंगा। फिर हिरण आखेटक से विनती करता है बाद में शिकारी को हिरण पर दया आ जाती है और उसे वह जाने देता है।

इस तरह से सुबह हो जाता है और घर पर उसके बीवी और बच्चे परेशान रहते हैं, प्रतीक्षा करते करते उसके बीवी और बच्चे शिकारी को खोजने जंगल की तरफ निकल जाते हैं। मिलने पर आकर ट्रक को खाली हाथ एक उसके बीवी और बच्चे फिर निराश होते हैं और कहते हैं अब हम क्या करें।

कार के लिए बैठा होता है संजोग से वह रात्रि शिवरात्रि की रात होती है और आखेटक की स्पीड पर बैठा होता है उस पेड़ के पत्ते गिर कर नीचे शिवलिंग पर गिरते हैं जिससे भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और आखेटक और उसके परिवार को साक्षात दर्शन देते है। भगवान शिव आखेटक से कहते हैं कि यह आखेटक तुमने शिवरात्रि की रात्रि जगा कर मेरी पूजा की है मैं तुम पर प्रसन्न हूं वर मांगो!

आखेटक बोलता है प्रभु आपके दर्शन मात्र से मैं धन्य धन्य हो गया, मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आपके श्री चरणों में स्थान चाहिए। भगवान शंकर बोलते हैं नहीं मैं तुम से अति प्रसन्न हूं तुम वर मांगो!

तब आखेटक बोलता है हे प्रभु यदि आप मुझ पर सच में पसंद है तो मुझे इस आखेटक के काम से सदा के लिए निकलने का आशीर्वाद दें और अपने श्री चरणों में स्थान दे।

तब भगवान शंकर तथास्तु बोलते है और कहते हैं हे तक तुम अंत समय में शिवपुरी में प्रस्थान करोगे। और जो भक्त शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर इस कथा को सुनेगा उसे परमधाम की प्राप्ति होगी।