Happy Mahashivratri 2022 : महाशिवरात्रि की रात को जागना जरूरी क्यों होता है?

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महाशिवरात्रि भगवान आदियोगी महादेव शंकर के उपासना का एक महान रात्रि है। महाशिवरात्रि को दिन मे व्रत कर रात मे जागने का विधान है ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते है।

शिवरात्रि की प्रचलित सभी धार्मिक कथाओं मे शिवरात्रि की रात्रि मे जागने पर महादेव की कृपा प्राप्त होती है।

शिवरात्रि की रात ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम

ईशा फाउंडेशन जिस के संस्थापक सतगुरु हैं, सद्गुरु शिवरात्रि की रात को असम की महान शिव प्रतिमा के सामने रात्रि जागरण करते हैं और लोगों से रात में जगने के लिए भी कहते हैं। क्योंकि शिवरात्रि की रात्रि जगने की रात्रि होती है।

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शिव महापुराण में वर्णित आखेटक और हिजड़े की कथा में भी आखेटक शिवरात्रि की रात को जागरण करता है और पूरे दिन भूखे रहता है जिससे भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और उसे साक्षात दर्शन देते हैं।

 कहा जाता है कि इस रात को ऊर्जा का प्रवाह उपर की ओर होता है. इक्विनोस यानी इस समय ग्रह का सेंट्रल फ्यूगल फोर्स एक खास तरह से काम करता है और ये बल उपर की ओर गति करता है. इसीलिए यौगिक परंपराओं ने ये नियम बनाया था कि कोई भी इस रात को लेटेगा नहीं. आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए ताकि आप ऊर्जा के इस प्राकृतिक चढ़ाव का पूरा लाभ ले सकें और ऊर्जा ऊपर की ओर जा सके.

सद्गुरू जग्‍गी वासुदेव कहते हैं कि इसीलिए कर्नाटक के कुछ इलाकों में बच्‍चों से कहा जाता है कि वे लोगों के घरों में जाकर पत्‍थर मारें. वे आज ऐसी शरारत कर सकते हैं. चाहे लोग उठकर गुस्‍सा करें या उन्‍हें डांटें, पर वे उठ तो जाते हैं.इस दिन हमारे तंत्र की ऊर्जा में प्राकृतिक चढ़ाव होता है. लेटे रहना हमारे तंत्र के लिए अच्‍छा नहीं होगा. इसलिए लंबवत यानी बिल्‍कुल सीधा रहना चाहिए.