स्वस्थ रहने के जरूरी नियम

मै आज आप को ज़िन्दगी भर स्वस्थ रहने के कुछ नियम बता रहा हु, मै आप को विनम्रता पूर्वक और पुरे विश्वास के साथ कह सकता हु की अगर आप इन नियमो का पालन करते है तो आप कभी बीमार नहीं पडेगे। जो नियम मै आप को बताने वाला हु ये स्वस्थ रहने के जरूरी नियम और महत्वपूर्ण नियम है इन नियमो का पालन हर योग ऋषि करते है।

स्वस्थ रहने के जरूरी नियम

अगर आप इन नियमो का पालन करते है तो आप का ब्लड प्रेशर नार्मल रहेगा, शुगर नार्मल रहेगा, कोलोस्ट्राल नार्मल रहेगा, कभी सर्दी,  जुखाम, बुखार नहीं होगा कभी गला नहीं बैठेगा, कुल मिलाकर आप को कभी हॉस्पिटल नहीं जाना पड़ेगा, क्योकि आप को इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

पहली चीज जो सबसे ज़रूरी है वो मै आप से बताना चाहुँगा की अगर आप कभी बीमार नहीं पड़ना चाहते है तो आप को आयुर्वेद के नियमों का पालन करना पड़ेगा, अगर आप आयुर्वेद के नियमों का पालन करते है तो आप को कभी अस्पताल जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

किसी भी व्यक्ति को अगर स्वस्थ रहना है तो आयुर्वेद मे कहा गया है की वह अपने कफ, पित्त और वात को संतुलित रखे। तीन तरह के दोष है हमारे शरीर मे वात, पित्त और कफ, ये त्रिदोष आधरित शरीर है। ज़ब पित्त बहुत बिगड़ जाता है तो 45 से 50 रोग आते है, ज़ब वात बहुत बिगड़ जाता है तो 80 से ज्यादा रोग आता है और ज़ब कफ बिगड़ जाता है तो 28 रोग आता है, और ज़ब वात, पित्त और कफ तीनो बिगड़ जाता है तो 148 से ज्यादा रोग आता है। सर्दी जुकाम, बुखार से लेकर कैंसर तक वात, पित्त और कफ के बिगड़ने का खेल है।

इस देश मे अनेक चिकित्सक ऋषि हुए है जैसे चरक ऋषि, सुश्रुत ऋषि ऐसे एक ऋषि हुए वाग्भट्ट जी। इन्होने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है अष्टांगहिर्दयाम और एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है अष्टांगसंग्रहम, इन दोनो पुस्तको मे उन्होंने  आयुर्वेद के 7000 नियम बताये है जिनमे से मै आज आप को चार नियम बता रहा हु अगर अच्छे लगे तो ज़रूर पालन करिये गा। और दुसरो को भी बताइये ताकि कोई भी बीमार न पड़े, और आप दुसरो की मदद कर पाओगे।

ये चारो नियम पित्त, कफ और वात को संतुलित करने के लिए है अब वात, पित्त और कफ एक साथ संतुलित रहे इसके लिए पहला नियम है –

स्वस्थ रहने के जरूरी नियम-

1. खाना खाने के बाद पानी नहीं पीना

यह पहला नियम है, अब आप बोलेगे ये तो बहुत मुश्किल है की खाना खाने के बाद पानी नहीं पिए, हम तो खाना खाने से ज्यादा पानी ही पी लेते है। ये खाना खाने के बाद पानी कभी नहीं पीना चाहिए। महर्षि वाग्भट्ट कहते है की भोजन के अंत मे पानी पियो तो ज़हर  पिने के जैसा है। इसलिए खाने के अंत मे पानी नहीं पिए।

कारण

अब मै आप को इसका कारण बहुत ही सरल भाषा मे बतानाचाहता हु, की भोजन के बाद पानी क्यों नहीं पीना चाहिए. हमारे पेट मे एक जगह होता है जिसका नाम है जठर  संस्कृत मे, हिंदी मे इसको जठर कहते है इंग्लिश मे इसको Epigastrium कहते है। इसको कुछ लोग अमाशय भी कहते  है ये पेट मे नाभि के बाई तरफ एक छोटा सा स्थान होता है।  हम जो भी खाते है सारा खाना यही पर आता है अब ज़ब सब कुछ जठर मे आता है तो यहां आग जलती है जिसे कहते है जठरआग्नि या  जठराग्नि।

आप जैसे ही खाना खाते हो यह अग्नि आप के खाने को पचाती है, यह क्रिया वैसे ही होती है जैसे हम रसोई घर मे खाना पकाते है। जैसे ज़ब तक अग्नि जलती है तब तक खाना पकता है वैसे हमारे पेट मे भी ज़ब तक जठराग्नि जलती है तब तक खाना पकता है जिसे digestion कहते है।

अब आप मेरे एक प्रश्न का उत्तर दो मान लो आप आग पर खाना पका रहे हो खाना पक ही रहा है की आप ने आग मे पानी डाल दी तो क्या खाना पकेगा?  नहीं। वैसे ही ज़ब आप खाना खाते हो तो जठर मे अग्नि जलती है तब तक आप पानी पी लेते हो तो वह अग्नि जो अभी जल रही थी वह बुझ गई, ज़ब अग्नि बुझ गई तो आप ने जो खाया वह पचा नहीं और जब खाना पचता नहीं है तो वह सड़ेगा और जब सड़ेगा तब 100 से ज्यादा विष बनेगे और आप को 100से ज्यादा बीमारीया होंगी।

अगर आप का खाना पचता नहीं है तो आप के पेट मे जलन होंगी, गैस बनेगा, पेट फूलेगा, बदहज़मी होंगी। इसलिए महर्षि बागभट्ट कहते है की खाना कहते ही पानी मत पियो, खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही पानी पिए

और पानी पी कर तुरंत खाना नहीं खाना चाहिए खाना खाने से कम से कम 45 मिनट पहले पानी पिए तब जा कर आप का खाना पूरी तरह पचेगा और जब खाना पूरी तरह पचेगा तभी वह आप के शरीर मे लगेगा जिससे मांस, मज़्ज़ा, वीर्य, रक्त बनेगा।

अब आप पूछोगे खाने के बाद आखिर पिए क्या तो महर्षि बागभट्ट जी कहते है आप दही का लस्सी पी लो, निम्बू का पानी पी ली, आनर का रस पी लो। वात, पित्त और कफ इस एक छोटी से नियम से संतुलित रहते है।

2. पानी कभी भी घुट घुट कर पिए

महर्षि बागभट्ट जी कहते है की पानी हमेसा घुट घुट कर पीना चाहिए। जैसे हम चाय, कॉफ़ी पीते है वैसे ही हमें पानी को भी पीना चाहिए।

कारण

इसके पीछे कारण यह है की जब हम पानी को घुट घुट कर पीते है तो हमारे मुँह मे जो लार होता है वह पानी के साथ पेट मे चला जाता है और ये लार होता है ये क्षारीय होता है और पेट मे हमेशा अम्ल होता है और जब अम्ल और क्षार (लार )पेट मे जाते है और ये जितने ज्यादा मात्र मे जाएग आप को कभी Acidity नहीं होंगी, आप का कभी वात, पित्त का सकंतुल बिगड़ेगा नही और आप कभी बीमार नहीं पड़ोगे।

इसलिए हमेसा पानी घुट घुट कर पिए।

3. ज़िन्दगी मे चाहे कितनी भी प्यास क्यों न लगे कभी ठंडा पानी न पिए

आप को कितनी भी प्यास क्यों न लगे प्रयास करे की -ve तापमान वाला पानी न पिए।

कारण

जब आप थके हुए होते हो तो आप का पेट गर्म होता है और जब आप ठंडा पानी पीते हो तो दोनों मे झगड़ा होता है और अगर आप का पेट ठंडा हो गया तो ठंडा हो जायेगा आप का ह्रदय ठंडा हो जाये और ह्रदय के ठंडा होते ही मस्तिष्क ठंडा हो जायेगा और मस्तिष्क के ठंडा होते ही आप का शरीर ठंडा हो जाएगा और शरीर के ठंडा होते ही राम नाम सत्य हो जाता है।

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